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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2713

नंबर 2713किताब 42, नंबर 26
حَدَّثَنَا مَحْمُودُ بْنُ غَيْلاَنَ، حَدَّثَنَا شَبَابَةُ، عَنْ حَمْزَةَ، عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ، عَنْ جَابِرٍ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ إِذَا كَتَبَ أَحَدُكُمْ كِتَابًا فَلْيُتَرِّبْهُ فَإِنَّهُ أَنْجَحُ لِلْحَاجَةِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ مُنْكَرٌ لاَ نَعْرِفُهُ عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ إِلاَّ مِنْ هَذَا الْوَجْهِ ‏.‏ قَالَ وَحَمْزَةُ هُوَ عِنْدِي ابْنُ عَمْرٍو النَّصِيبِيُّ هُوَ ضَعِيفٌ فِي الْحَدِيثِ ‏.‏
Narrated Jabir:that the Messenger of Allah (ﷺ) said: "When one of you writes something, then let him Yutarrib (smeared with dust to dry the ink) it, for that is more conducive to the need
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAhmad Muhammad Shakir
  • DaifAl-Albani
  • DaifBashar Awad Maarouf
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 42 · Chapters on Seeking Permission

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।