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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2711

नंबर 2711किताब 42, नंबर 24
حَدَّثَنَا سُوَيْدُ بْنُ نَصْرٍ، أَخْبَرَنَا ابْنُ الْمُبَارَكِ، أَنْبَأَنَا شُعْبَةُ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ الْمُنْكَدِرِ، عَنْ جَابِرٍ، قَالَ اسْتَأْذَنْتُ عَلَى النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فِي دَيْنٍ كَانَ عَلَى أَبِي فَقَالَ ‏"‏ مَنْ هَذَا ‏"‏ ‏.‏ فَقُلْتُ أَنَا ‏.‏ فَقَالَ ‏"‏ أَنَا أَنَا ‏"‏ ‏.‏ كَأَنَّهُ كَرِهَ ذَلِكَ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏
Narrated Jabir:"I sought permission to enter upon the Prophet (ﷺ) regarding a debt my father owed, so he said: 'Who is this?' I said: 'Me.' He said: 'Me, me.'As if he disliked that
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 42 · Chapters on Seeking Permission

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।