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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2665

नंबर 2665किताब 41, नंबर 21
حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ وَكِيعٍ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ، عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَسَارٍ، عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ، قَالَ اسْتَأْذَنَّا النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم فِي الْكِتَابَةِ فَلَمْ يَأْذَنْ لَنَا ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى وَقَدْ رُوِيَ هَذَا الْحَدِيثُ مِنْ غَيْرِ هَذَا الْوَجْهِ أَيْضًا عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ رَوَاهُ هَمَّامٌ عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ ‏.‏
Narrated Abu Sa'eed Al-Khudri:"We sought permission from the Messenger of Allah (ﷺ) for writing but he did not permit us
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 41 · Chapters on Knowledge

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।