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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2655

नंबर 2655किताब 41, नंबर 11
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ نَصْرِ بْنِ عَلِيٍّ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبَّادٍ الْهُنَائِيُّ، حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ الْمُبَارَكِ، عَنْ أَيُّوبَ السِّخْتِيَانِيِّ، عَنْ خَالِدِ بْنِ دُرَيْكٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ مَنْ تَعَلَّمَ عِلْمًا لِغَيْرِ اللَّهِ أَوْ أَرَادَ بِهِ غَيْرَ اللَّهِ فَلْيَتَبَوَّأْ مَقْعَدَهُ مِنَ النَّارِ ‏"‏ ‏.‏ وَفِي الْبَابِ عَنْ جَابِرٍ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ لاَ نَعْرِفُهُ مِنْ حَدِيثِ أَيُّوبَ إِلاَّ مِنْ هَذَا الْوَجْهِ ‏.‏
Narrated Ibn 'Umar:that the Prophet (ﷺ) said: "Whoever learns knowledge for other than (the sake of) Allah, or intends by it other than Allah, then let him take his seat in the Fire
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAhmad Muhammad Shakir
  • DaifAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 41 · Chapters on Knowledge

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।