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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2634

नंबर 2634किताब 40, नंबर 29
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ بَزِيعٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْحَكِيمِ بْنُ مَنْصُورٍ الْوَاسِطِيُّ، عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ عُمَيْرٍ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ قِتَالُ الْمُسْلِمِ أَخَاهُ كُفْرٌ وَسِبَابُهُ فُسُوقٌ ‏"‏ ‏.‏ وَفِي الْبَابِ عَنْ سَعْدٍ وَعَبْدِ اللَّهِ بْنِ مُغَفَّلٍ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ ابْنِ مَسْعُودٍ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏ وَقَدْ رُوِيَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍ مِنْ غَيْرِ وَجْهٍ ‏.‏
Narrated Ibn Mas'ud:that the Messenger of Allah (ﷺ) said: "A Muslim's fighting his brother is disbelief, and verbally abusing him is disobedience
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 40 · The Book on Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।