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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2626

नंबर 2626किताब 40, नंबर 21
حَدَّثَنَا أَبُو عُبَيْدَةَ بْنُ أَبِي السَّفَرِ، - وَاسْمُهُ أَحْمَدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ الْهَمْدَانِيُّ الْكُوفِيُّ قَالَ حَدَّثَنَا حَجَّاجُ بْنُ مُحَمَّدٍ، عَنْ يُونُسَ بْنِ أَبِي إِسْحَاقَ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ الْهَمْدَانِيِّ، عَنْ أَبِي جُحَيْفَةَ، عَنْ عَلِيٍّ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ مَنْ أَصَابَ حَدًّا فَعُجِّلَ عُقُوبَتُهُ فِي الدُّنْيَا فَاللَّهُ أَعْدَلُ مِنْ أَنْ يُثَنِّيَ عَلَى عَبْدِهِ الْعُقُوبَةَ فِي الآخِرَةِ وَمَنْ أَصَابَ حَدًّا فَسَتَرَهُ اللَّهُ عَلَيْهِ وَعَفَا عَنْهُ فَاللَّهُ أَكْرَمُ مِنْ أَنْ يَعُودَ فِي شَيْءٍ قَدْ عَفَا عَنْهُ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى وَهَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ صَحِيحٌ ‏.‏ وَهَذَا قَوْلُ أَهْلِ الْعِلْمِ لاَ نَعْلَمُ أَحَدًا كَفَّرَ أَحَدًا بِالزِّنَا أَوِ السَّرِقَةِ وَشُرْبِ الْخَمْرِ ‏.‏
अली -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है कि अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "जिसने ख़ुद को शरई दंड का हक़दार बना लिया और उसे दुनिया में दंड दे दिया गया, तो अल्लाह का न्याय इस बात की अनुमति नहीं देता कि अपने बंदे को आख़िरत में दोबारा दंड दे। तथा जिसने ख़ुद को शरई दंड का हक़दार बना लिया और अल्लाह ने उसके इस कृत्य पर पर्दा डाल दिया तथा क्षमा कर दिया, तो अल्लाह की उदारता इस बात की अनुमति नहीं देती कि क्षमा की हुई किसी चीज़ की ओर लौटे।"

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAhmad Muhammad Shakir
  • DaifAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 40 · The Book on Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।