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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2622

नंबर 2622किताब 40, नंबर 17
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ، حَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ الْمُفَضَّلِ، عَنِ الْجُرَيْرِيِّ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ شَقِيقٍ الْعُقَيْلِيِّ، قَالَ كَانَ أَصْحَابُ مُحَمَّدٍ صلى الله عليه وسلم لاَ يَرَوْنَ شَيْئًا مِنَ الأَعْمَالِ تَرْكُهُ كُفْرٌ غَيْرَ الصَّلاَةِ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى سَمِعْتُ أَبَا مُصْعَبٍ الْمَدَنِيَّ يَقُولُ مَنْ قَالَ الإِيمَانُ قَوْلٌ يُسْتَتَابُ فَإِنْ تَابَ وَإِلاَّ ضُرِبَتْ عُنُقُهُ ‏.‏
Narrated Abdullah bin Shaqiq Al-'Uqayli:The Companions of Muhammad (ﷺ) didn't consider leaving anything to be disblief except for the Salat
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 40 · The Book on Faith

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।