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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 520

नंबर 520किताब 4, नंबर 33
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ، أَخْبَرَنَا شَرِيكٌ، عَنْ مُخَوَّلِ بْنِ رَاشِدٍ، عَنْ مُسْلِمٍ الْبَطِينِ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقْرَأُ يَوْمَ الْجُمُعَةِ فِي صَلاَةِ الْفَجْرِ * ‏(‏تَنْزِيلُ ‏)‏ السَّجْدَةَ وَ ‏(‏هَلْ أَتَى عَلَى الإِنْسَانِ ‏)‏ ‏.‏ قَالَ وَفِي الْبَابِ عَنْ سَعْدٍ وَابْنِ مَسْعُودٍ وَأَبِي هُرَيْرَةَ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ ابْنِ عَبَّاسٍ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏ وَقَدْ رَوَاهُ سُفْيَانُ الثَّوْرِيُّ وَشُعْبَةُ وَغَيْرُ وَاحِدٍ عَنْ مُخَوَّلٍ ‏.‏
Ibn Abbas narrated:"For the Fajr prayer on Friday, Allah's Messenger would recite: Alif Lam Mem (which is) revealed in (Surat) As-Sajdah and, Has there not been over man
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book on the Day of Friday

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।