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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2565

नंबर 2565किताब 38, नंबर 43
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، حَدَّثَنَا رَوْحُ بْنُ عُبَادَةَ، عَنِ الأَوْزَاعِيِّ، عَنْ يَحْيَى بْنِ أَبِي كَثِيرٍ، فِي قَوْلِهِ عَزَّ وَجَلَّ‏:‏ ‏(‏فَهُمْ فِي رَوْضَةٍ يُحْبَرُونَ ‏)‏ قَالَ السَّمَّاعُ ‏.‏ وَمَعْنَى السَّمَّاعِ مِثْلَ مَا وَرَدَ فِي الْحَدِيثِ أَنَّ الْحُورَ الْعِينَ يُرَفِّعْنَ بِأَصْوَاتِهِنَّ ‏.‏
From Yahya bin Abi Kathir, concerning His (Allah's), the Mighty and Glorious, statement:"Then they shall be in gardens living luxuriously" He said: "Listening."And the meaning of listening is similar to what has been mentioned in the Hadith that Al-Hur Al-'Ein raise their voices
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 38 · Chapters on the description of Paradise

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।