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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2480

नंबर 2480किताब 37, नंबर 66
حَدَّثَنَا الْجَارُودُ بْنُ مُعَاذٍ، حَدَّثَنَا الْفَضْلُ بْنُ مُوسَى، عَنْ سُفْيَانَ الثَّوْرِيِّ، عَنْ أَبِي حَمْزَةَ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ النَّخَعِيِّ، قَالَ الْبِنَاءُ كُلُّهُ وَبَالٌ قُلْتُ أَرَأَيْتَ مَا لاَ بُدَّ مِنْهُ قَالَ لاَ أَجْرَ وَلاَ وِزْرَ ‏.‏
Sufyan Ath-Thawri narrated:From Abu Hamzah, (who said): "From Ibrahim An-Nakha'i who said: 'All buildings and concerns for them will be against you.' I said: 'What do you think about what one can not do without?' He said: 'There is no reward for that nor harm
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Daif Isnaad MaqtuAhmad Muhammad Shakir
  • Daif Isnaad MaqtuAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 37 · Chapters on the description of the Day of Judgement, Ar-Riqaq, and Al-Wara'

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।