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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2464

नंबर 2464किताब 37, नंबर 50
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ، حَدَّثَنَا أَبُو صَفْوَانَ، عَنْ يُونُسَ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ حُمَيْدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَوْفٍ، قَالَ ابْتُلِينَا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بِالضَّرَّاءِ فَصَبَرْنَا ثُمَّ ابْتُلِينَا بِالسَّرَّاءِ بَعْدَهُ فَلَمْ نَصْبِرْ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ ‏.‏
Abdur-Rahman bin 'Awf said:"We were tested along with the Messenger of Allah(s.a.w) by adversity, so we were patient, then we were tested after him with prosperity, but we were not patient
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Hasan IsnaadAhmad Muhammad Shakir
  • Hasan IsnaadAl-Albani
  • HasanBashar Awad Maarouf
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 37 · Chapters on the description of the Day of Judgement, Ar-Riqaq, and Al-Wara'

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।