सीधे कंटेंट पर जाएँ
जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2439

नंबर 2439किताब 37, नंबर 25
حَدَّثَنَا أَبُو هِشَامٍ الرِّفَاعِيُّ، مُحَمَّدُ بْنُ يَزِيدَ الْكُوفِيُّ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ الْيَمَانِ، عَنْ جِسْرٍ أَبِي جَعْفَرٍ، عَنِ الْحَسَنِ الْبَصْرِيِّ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ يَشْفَعُ عُثْمَانُ بْنُ عَفَّانَ يَوْمَ الْقِيَامَةِ فِي مِثْلِ رَبِيعَةَ وَمُضَرَ ‏"‏ ‏.‏
Al-Hasan Al-Basri said:"The Messenger of Allah (s.a.w) said: 'On the Day of Judgement, 'Uthman bin 'Affan will intercede for (an amount) the likes of Rabi'ah and Mudar
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Daif IsnaadAhmad Muhammad Shakir
  • Daif IsnaadAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 37 · Chapters on the description of the Day of Judgement, Ar-Riqaq, and Al-Wara'

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।