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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2406

नंबर 2406किताब 36, नंबर 104
حَدَّثَنَا صَالِحُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ الْمُبَارَكِ، ح وَحَدَّثَنَا سُوَيْدُ بْنُ نَصْرٍ، أَخْبَرَنَا ابْنُ الْمُبَارَكِ، عَنْ يَحْيَى بْنِ أَيُّوبَ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ زَحْرٍ، عَنْ عَلِيِّ بْنِ يَزِيدَ، عَنِ الْقَاسِمِ، عَنْ أَبِي أُمَامَةَ، عَنْ عُقْبَةَ بْنِ عَامِرٍ، قَالَ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ مَا النَّجَاةُ قَالَ ‏ "‏ أَمْسِكْ عَلَيْكَ لِسَانَكَ وَلْيَسَعْكَ بَيْتُكَ وَابْكِ عَلَى خَطِيئَتِكَ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ ‏.‏
Uqbah bin 'Amir narrated:"I said: 'O Messenger of Allah! What is the means to salvation?' He said: 'That you control your tongue, suffice yourself your house, and cry over your sins
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 36 · Chapters On Zuhd

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।