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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2394

नंबर 2394किताब 36, नंबर 92
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عُثْمَانَ الْكُوفِيُّ، حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُوسَى، عَنْ سَالِمٍ الْخَيَّاطِ، عَنِ الْحَسَنِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ أَمَرَنَا رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَنْ نَحْثُوَ فِي أَفْوَاهِ الْمَدَّاحِينَ التُّرَابَ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ غَرِيبٌ مِنْ حَدِيثِ أَبِي هُرَيْرَةَ ‏.‏
Abu Hurairah narrated:"The Messenger of Allah(s.a.w) ordered us to throw dut in the mouths of those who praise others
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih LighairihiAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 36 · Chapters On Zuhd

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।