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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2386

नंबर 2386किताब 36, नंबर 83
حَدَّثَنَا أَبُو هِشَامٍ الرِّفَاعِيُّ، حَدَّثَنَا حَفْصُ بْنُ غِيَاثٍ، عَنْ أَشْعَثَ، عَنِ الْحَسَنِ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ الْمَرْءُ مَعَ مَنْ أَحَبَّ وَلَهُ مَا اكْتَسَبَ ‏"‏ ‏.‏ وَفِي الْبَابِ عَنْ عَلِيٍّ وَعَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍ وَصَفْوَانَ بْنِ عَسَّالٍ وَأَبِي هُرَيْرَةَ وَأَبِي مُوسَى ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ مِنْ حَدِيثِ الْحَسَنِ الْبَصْرِيِّ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم ‏.‏ وَقَدْ رُوِيَ هَذَا الْحَدِيثُ مِنْ غَيْرِ وَجْهٍ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم ‏.‏
Anas bin Malik narrated that the Messenger of Allah (s.a.w) said:" A man shall be with whoever he loves, and for him shall be what he has earned
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • DaifAl-Albani
  • HasanBashar Awad Maarouf
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 36 · Chapters On Zuhd

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।