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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2358

नंबर 2358किताब 36, नंबर 55
حَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ، مُحَمَّدُ بْنُ الْعَلاَءِ حَدَّثَنَا الْمُحَارِبِيُّ، حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ كَيْسَانَ، عَنْ أَبِي حَازِمٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ مَا شَبِعَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم وَأَهْلُهُ ثَلاَثًا تِبَاعًا مِنْ خُبْزِ الْبُرِّ حَتَّى فَارَقَ الدُّنْيَا ‏.‏ هَذَا حَدِيثٌ صَحِيحٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ مِنْ هَذَا الْوَجْهِ ‏.‏
Abu Hurairah narrated:"Neither the Messenger of Allah (s.a.w) nor his family, ate their fill of wheat bread for three consecutive days until he parted the world
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 36 · Chapters On Zuhd

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।