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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2351

नंबर 2351किताब 36, नंबर 48
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مُوسَى الْبَصْرِيُّ، حَدَّثَنَا زِيَادُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ عَطِيَّةَ، عَنْ أَبِي سَعِيدٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ فُقَرَاءُ الْمُهَاجِرِينَ يَدْخُلُونَ الْجَنَّةَ قَبْلَ أَغْنِيَائِهِمْ بِخَمْسِمِائَةِ سَنَةٍ ‏"‏ ‏.‏ وَفِي الْبَابِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ وَعَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو وَجَابِرٍ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ مِنْ هَذَا الْوَجْهِ ‏.‏
Abu Sa'eed narrated that the Messenger of Allah (s.a.w) said:"The poor Muhajirin will enter Paradise before the rich among them by five hundred years
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 36 · Chapters On Zuhd

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।