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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2336

नंबर 2336किताब 36, नंबर 33
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ مَنِيعٍ، حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ سَوَّارٍ، حَدَّثَنَا لَيْثُ بْنُ سَعْدٍ، عَنْ مُعَاوِيَةَ بْنِ صَالِحٍ، أَنَّ عَبْدَ الرَّحْمَنِ بْنَ جُبَيْرِ بْنِ نُفَيْرِ، حَدَّثَهُ عَنْ أَبِيهِ، عَنْ كَعْبِ بْنِ عِيَاضٍ، قَالَ سَمِعْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ إِنَّ لِكُلِّ أُمَّةٍ فِتْنَةً وَفِتْنَةُ أُمَّتِي الْمَالُ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ صَحِيحٌ غَرِيبٌ إِنَّمَا نَعْرِفُهُ مِنْ حَدِيثِ مُعَاوِيَةَ بْنِ صَالِحٍ ‏.‏
Ka'b bin 'Iyad narrated that the Prophet (s.a.w) said:"Indeed there is a fitnah for every Ummah, and the Fitnah for my Ummah is wealth
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 36 · Chapters On Zuhd

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।