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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2309

नंबर 2309किताब 36, नंबर 6
حَدَّثَنَا مَحْمُودُ بْنُ غَيْلاَنَ، حَدَّثَنَا أَبُو دَاوُدَ، أَخْبَرَنَا شُعْبَةُ، عَنْ قَتَادَةَ، قَالَ سَمِعْتُ أَنَسًا، يُحَدِّثُ عَنْ عُبَادَةَ بْنِ الصَّامِتِ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ مَنْ أَحَبَّ لِقَاءَ اللَّهِ أَحَبَّ اللَّهُ لِقَاءَهُ وَمَنْ كَرِهَ لِقَاءَ اللَّهِ كَرِهَ اللَّهُ لِقَاءَهُ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ وَفِي الْبَابِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ وَعَائِشَةَ وَأَنَسٍ وَأَبِي مُوسَى ‏.‏ قَالَ حَدِيثُ عُبَادَةَ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏
Ubadah bin As-Samit narrated that the Messenger of Allah (s.a.w) said:"Whoever loves to meet Allah, Allah loves to meet him. Whoever is averse to meeting Allah, Allah is averse to meeting him
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 36 · Chapters On Zuhd

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।