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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2302.2

नंबर 2302.2किताब 35, नंबर 9
حَدَّثَنَا أَبُو عَمَّارٍ الْحُسَيْنُ بْنُ حُرَيْثٍ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنِ الأَعْمَشِ، حَدَّثَنَا هِلاَلُ بْنُ يِسَافٍ، عَنْ عِمْرَانَ بْنِ حُصَيْنٍ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم نَحْوَهُ ‏.‏ وَهَذَا أَصَحُّ مِنْ حَدِيثِ مُحَمَّدِ بْنِ فُضَيْلٍ ‏.‏ قَالَ وَمَعْنَى هَذَا الْحَدِيثِ عِنْدَ بَعْضِ أَهْلِ الْعِلْمِ ‏"‏ يُعْطُونَ الشَّهَادَةَ قَبْلَ أَنْ يُسْأَلُوهَا ‏"‏ ‏.‏ إِنَّمَا يَعْنِي شَهَادَةَ الزُّورِ يَقُولُ يَشْهَدُ أَحَدُهُمْ مِنْ غَيْرِ أَنْ يُسْتَشْهَدَ وَبَيَانُ هَذَا فِي [الحديث التالي]
Another chain on the authority of 'Imran bin Husain narrates a similar narration

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 35 · Chapters On Witnesses

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।