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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2271

नंबर 2271किताब 34, नंबर 2
حَدَّثَنَا مَحْمُودُ بْنُ غَيْلاَنَ، حَدَّثَنَا أَبُو دَاوُدَ، عَنْ شُعْبَةَ، عَنْ قَتَادَةَ، أَنَّهُ سَمِعَ أَنَسًا، عَنْ عُبَادَةَ بْنِ الصَّامِتِ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ رُؤْيَا الْمُؤْمِنِ جُزْءٌ مِنْ سِتَّةٍ وَأَرْبَعِينَ جُزْءًا مِنَ النُّبُوَّةِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ وَفِي الْبَابِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ وَأَبِي رَزِينٍ الْعُقَيْلِيِّ وَأَبِي سَعِيدٍ وَعَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو وَعَوْفِ بْنِ مَالِكٍ وَابْنِ عُمَرَ وَأَنَسٍ ‏.‏ قَالَ وَحَدِيثُ عُبَادَةَ حَدِيثٌ صَحِيحٌ ‏.‏
Ubadah bin As-Samit narrated that the Prophet (s.a.w) said:"The dreams of the believer are a portion of the forty-six portions of Prophet-hood
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • SahihBashar Awad Maarouf
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 34 · Chapters On Dreams

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।