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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2260

नंबर 2260किताब 33, नंबर 103
حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ مُوسَى الْفَزَارِيُّ ابْنُ بِنْتِ السُّدِّيِّ الْكُوفِيِّ، حَدَّثَنَا عُمَرُ بْنُ شَاكِرٍ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ يَأْتِي عَلَى النَّاسِ زَمَانٌ الصَّابِرُ فِيهِمْ عَلَى دِينِهِ كَالْقَابِضِ عَلَى الْجَمْرِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ غَرِيبٌ مِنْ هَذَا الْوَجْهِ ‏.‏ وَعُمَرُ بْنُ شَاكِرٍ شَيْخٌ بَصْرِيٌّ قَدْ رَوَى عَنْهُ غَيْرُ وَاحِدٍ مِنْ أَهْلِ الْعِلْمِ ‏.‏
Anas bin Malik narrated that the Messenger of Allah(s.a.w) said:"There shall come upon the people a time in which the one who is patient upon his religion will be like the one holding onto a burning ember
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 33 · Chapters On Al-Fitan

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।