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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2254

नंबर 2254किताब 33, नंबर 97
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ عَاصِمٍ، حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ، عَنْ عَلِيِّ بْنِ زَيْدٍ، عَنِ الْحَسَنِ، عَنْ جُنْدُبٍ، عَنْ حُذَيْفَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ لاَ يَنْبَغِي لِلْمُؤْمِنِ أَنْ يُذِلَّ نَفْسَهُ ‏"‏ ‏.‏ قَالُوا وَكَيْفَ يُذِلُّ نَفْسَهُ ‏.‏ قَالَ ‏"‏ يَتَعَرَّضُ مِنَ الْبَلاَءِ لِمَا لاَ يُطِيقُ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ ‏.‏
It was narrated from Hudhaifah, that the Messenger of Allah(s.a.w) said:"It is not for the believer to humiliate himself." They said: "How does he humiliate himself?" He said: "By taking on a trial which he can not bear
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 33 · Chapters On Al-Fitan

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।