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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2201

नंबर 2201किताब 33, नंबर 44
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ، حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ، عَنِ الْمُعَلَّى بْنِ زِيَادٍ، رَدَّهُ إِلَى مُعَاوِيَةَ بْنِ قُرَّةَ رَدَّهُ إِلَى مَعْقِلِ بْنِ يَسَارٍ رَدَّهُ إِلَى النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ الْعِبَادَةُ فِي الْهَرْجِ كَالْهِجْرَةِ إِلَىَّ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ صَحِيحٌ غَرِيبٌ إِنَّمَا نَعْرِفُهُ مِنْ حَدِيثِ حَمَّادِ بْنِ زَيْدٍ عَنِ الْمُعَلَّى ‏.‏
Ma'qil bin Yasar narrated that the Prophet(s.a.w) said:"Worship during Al-Harj is like Hijrah to me
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • SahihBashar Awad Maarouf
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 33 · Chapters On Al-Fitan

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।