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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2166

नंबर 2166किताब 33, नंबर 9
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ مُوسَى، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، أَخْبَرَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ مَيْمُونٍ، عَنِ ابْنِ طَاوُسٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ يَدُ اللَّهِ مَعَ الْجَمَاعَةِ ‏"‏ ‏.‏ هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ لاَ نَعْرِفُهُ مِنْ حَدِيثِ ابْنِ عَبَّاسٍ إِلاَّ مِنْ هَذَا الْوَجْهِ ‏.‏
Ibn 'Abbas narrated that the Messenger of Allah (s.a.w) said:"Allah's Hand is with the Jama'ah
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 33 · Chapters On Al-Fitan

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।