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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2140

नंबर 2140किताब 32, नंबर 8
حَدَّثَنَا هَنَّادٌ، قال حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ أَبِي سُفْيَانَ، عَنْ أَنَسٍ، قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يُكْثِرُ أَنْ يَقُولَ ‏"‏ يَا مُقَلِّبَ الْقُلُوبِ ثَبِّتْ قَلْبِي عَلَى دِينِكَ ‏"‏ ‏.‏ فَقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ آمَنَّا بِكَ وَبِمَا جِئْتَ بِهِ فَهَلْ تَخَافُ عَلَيْنَا قَالَ ‏"‏ نَعَمْ إِنَّ الْقُلُوبَ بَيْنَ أَصْبُعَيْنِ مِنْ أَصَابِعِ اللَّهِ يُقَلِّبُهَا كَيْفَ يَشَاءُ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى وَفِي الْبَابِ عَنِ النَّوَّاسِ بْنِ سَمْعَانَ وَأُمِّ سَلَمَةَ وَعَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو وَعَائِشَةَ ‏.‏ وَهَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ وَهَكَذَا رَوَى غَيْرُ وَاحِدٍ عَنِ الأَعْمَشِ عَنْ أَبِي سُفْيَانَ عَنْ أَنَسٍ ‏.‏ وَرَوَى بَعْضُهُمْ عَنِ الأَعْمَشِ عَنْ أَبِي سُفْيَانَ عَنْ جَابِرٍ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم ‏.‏ وَحَدِيثُ أَبِي سُفْيَانَ عَنْ أَنَسٍ أَصَحُّ ‏.‏
अनस रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं : अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अक्सर यह दुआ पढ़ा करते थे : "يَا مُقَلِّبَ القُلُوبِ ثَبِّتْ قَلْبِي عَلَى دِينِكَ" (ऐ दिलों को पलटने वाले, मेरे दिल को अपने दीन पर जमाए रख।) मैंने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल, हम आपपर और आपके लाए हुए दीन पर ईमान ले आए हैं। फिर भी क्या आपको हमारे बारे में डर है? आपने कहा : "हाँ, निःसंदेह दिल अल्लाह की उंगलियों में से दो उंगलियों के बीच में हैं। अल्लाह जैसे चाहता है, उनको पलटता है।"

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 32 · Chapters On Al-Qadar

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।