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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 486

नंबर 486किताब 3, नंबर 34
حَدَّثَنَا أَبُو دَاوُدَ، سُلَيْمَانُ بْنُ سَلْمٍ الْمَصَاحِفِيُّ الْبَلْخِيُّ أَخْبَرَنَا النَّضْرُ بْنُ شُمَيْلٍ، عَنْ أَبِي قُرَّةَ الأَسَدِيِّ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ، عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ، قَالَ إِنَّ الدُّعَاءَ مَوْقُوفٌ بَيْنَ السَّمَاءِ وَالأَرْضِ لاَ يَصْعَدُ مِنْهُ شَيْءٌ حَتَّى تُصَلِّيَ عَلَى نَبِيِّكَ صلى الله عليه وسلم ‏.‏
Umar bin Al-Khattab narrated:"Indeed the supplication stops between the heavens and the earth. Nothing of it is raised up until you send Salat upon your Prophet
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • HasanAhmad Muhammad Shakir
  • HasanAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 3 · The Book on Al-Witr

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।