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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 484

नंबर 484किताब 3, नंबर 32
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، بُنْدَارٌ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ خَالِدِ ابْنُ عَثْمَةَ، حَدَّثَنِي مُوسَى بْنُ يَعْقُوبَ الزَّمْعِيُّ، حَدَّثَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ كَيْسَانَ، أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ شَدَّادٍ، أَخْبَرَهُ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏"‏ أَوْلَى النَّاسِ بِي يَوْمَ الْقِيَامَةِ أَكْثَرُهُمْ عَلَىَّ صَلاَةً ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ ‏.‏ وَرُوِيَ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم أَنَّهُ قَالَ ‏"‏ مَنْ صَلَّى عَلَىَّ صَلاَةً صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ بِهَا عَشْرًا وَكَتَبَ لَهُ بِهَا عَشْرَ حَسَنَاتٍ ‏"‏ ‏.‏
Abdullah bin Mas'ud narrated that :Allah's Messenger said: "The person closest to me on the Day of Judgement is the one who sent the most Salat upon me
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAhmad Muhammad Shakir
  • DaifAl-Albani
  • HasanBashar Awad Maarouf
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 3 · The Book on Al-Witr

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।