حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ مَسْعَدَةَ، عَنْ مَيْمُونِ بْنِ مُوسَى الْمَرَئِيِّ، عَنِ الْحَسَنِ، عَنْ أُمِّهِ، عَنْ أُمِّ سَلَمَةَ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم كَانَ يُصَلِّي بَعْدَ الْوِتْرِ رَكْعَتَيْنِ . قَالَ أَبُو عِيسَى وَقَدْ رُوِيَ نَحْوُ هَذَا عَنْ أَبِي أُمَامَةَ وَعَائِشَةَ وَغَيْرِ وَاحِدٍ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم .
Umm Salamah narrated:"The Prophet would pray two Rak'ah after Al-Witr
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAhmad Muhammad Shakir
SahihAl-Albani
SahihZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।