حَدَّثَنَا أَبُو حَفْصٍ، عَمْرُو بْنُ عَلِيٍّ, قال حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ كَثِيرٍ أَبُو غَسَّانَ الْعَنْبَرِيُّ، قال حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ الْمُبَارَكِ، عَنْ يَحْيَى بْنِ أَبِي كَثِيرٍ، حَدَّثَنِي حَيَّةُ بْنُ حَابِسٍ التَّمِيمِيُّ، حَدَّثَنِي أَبِي أَنَّهُ، سَمِعَ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ " لاَ شَىْءَ فِي الْهَامِ وَالْعَيْنُ حَقٌّ " .
Hayyah bin Habis At-Tamimi narrated:My father narrated that he heard the Messenger of Allah (s.a.w) saying: "There is nothing to Al-Ham, and the eye is real
स्रोत में दर्ज दर्जे
DaifAhmad Muhammad Shakir
DaifAl-Albani
Isnaad HasanZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।