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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2061

नंबर 2061किताब 28, नंबर 26
حَدَّثَنَا أَبُو حَفْصٍ، عَمْرُو بْنُ عَلِيٍّ, قال حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ كَثِيرٍ أَبُو غَسَّانَ الْعَنْبَرِيُّ، قال حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ الْمُبَارَكِ، عَنْ يَحْيَى بْنِ أَبِي كَثِيرٍ، حَدَّثَنِي حَيَّةُ بْنُ حَابِسٍ التَّمِيمِيُّ، حَدَّثَنِي أَبِي أَنَّهُ، سَمِعَ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ لاَ شَىْءَ فِي الْهَامِ وَالْعَيْنُ حَقٌّ ‏"‏ ‏.‏
Hayyah bin Habis At-Tamimi narrated:My father narrated that he heard the Messenger of Allah (s.a.w) saying: "There is nothing to Al-Ham, and the eye is real
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAhmad Muhammad Shakir
  • DaifAl-Albani
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 28 · Chapters on Medicine

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।