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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2011

नंबर 2011किताब 27, नंबर 117
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ بَزِيعٍ، حَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ الْمُفَضَّلِ، عَنْ قُرَّةَ بْنِ خَالِدٍ، عَنْ أَبِي جَمْرَةَ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ لأَشَجِّ عَبْدِ الْقَيْسِ ‏ "‏ إِنَّ فِيكَ خَصْلَتَيْنِ يُحِبُّهُمَا اللَّهُ الْحِلْمُ وَالأَنَاةُ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ غَرِيبٌ ‏.‏ وَفِي الْبَابِ عَنِ الأَشَجِّ الْعَصَرِيِّ ‏.‏
Ibn 'Abbas narrated that the Messenger of Allah said to the Ashajj 'Abdul-Qais:"Indeed there are two traits in you that Allah loves: Forbearance, and deliberateness
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 27 · Chapters on Righteousness And Maintaining Good Relations With Relatives

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।