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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2009

नंबर 2009किताब 27, नंबर 115
حَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ، حَدَّثَنَا عَبْدَةُ بْنُ سُلَيْمَانَ، وَعَبْدُ الرَّحِيمِ، وَمُحَمَّدُ بْنُ بِشْرٍ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَمْرٍو، حَدَّثَنَا أَبُو سَلَمَةَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ الْحَيَاءُ مِنَ الإِيمَانِ وَالإِيمَانُ فِي الْجَنَّةِ وَالْبَذَاءُ مِنَ الْجَفَاءِ وَالْجَفَاءُ فِي النَّارِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى وَفِي الْبَابِ عَنِ ابْنِ عُمَرَ وَأَبِي بَكْرَةَ وَأَبِي أُمَامَةَ وَعِمْرَانَ بْنِ حُصَيْنٍ ‏.‏ هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏
Abu Hurairah narrated that the Messenger of Allah said:"Al-Haya is from faith, and faith is in Paradise. Obscenity is from rudeness, and rudeness is in the Fire
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 27 · Chapters on Righteousness And Maintaining Good Relations With Relatives

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।