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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 1995

नंबर 1995किताब 27, नंबर 101
حَدَّثَنَا زِيَادُ بْنُ أَيُّوبَ الْبَغْدَادِيُّ، حَدَّثَنَا الْمُحَارِبِيُّ، عَنِ اللَّيْثِ، وَهُوَ ابْنُ أَبِي سُلَيْمٍ عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ، عَنْ عِكْرِمَةَ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لاَ تُمَارِ أَخَاكَ وَلاَ تُمَازِحْهُ وَلاَ تَعِدْهُ مَوْعِدَةً فَتُخْلِفَهُ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ لاَ نَعْرِفُهُ إِلاَّ مِنْ هَذَا الْوَجْهِ ‏.‏ وَعَبْدُ الْمَلِكِ عِنْدِي هُوَ ابْنُ أَبِي بَشِيرٍ ‏.‏
Ibn Abbas narrated that the Messenger of Allah said:"Do not argue with your brother, do not joke with him, and do not make a promise, only to not fulfill it
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAhmad Muhammad Shakir
  • DaifAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 27 · Chapters on Righteousness And Maintaining Good Relations With Relatives

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।