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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 1988

नंबर 1988किताब 27, नंबर 94
حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عُمَرَ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ أَبِي الزِّنَادِ، عَنِ الأَعْرَجِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ إِيَّاكُمْ وَالظَّنَّ فَإِنَّ الظَّنَّ أَكْذَبُ الْحَدِيثِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏ قَالَ وَسَمِعْتُ عَبْدَ بْنَ حُمَيْدٍ يَذْكُرُ عَنْ بَعْضِ أَصْحَابِ سُفْيَانَ قَالَ قَالَ سُفْيَانُ الظَّنُّ ظَنَّانِ فَظَنٌّ إِثْمٌ وَظَنٌّ لَيْسَ بِإِثْمٍ فَأَمَّا الظَّنُّ الَّذِي هُوَ إِثْمٌ فَالَّذِي يَظُنُّ ظَنًّا وَيَتَكَلَّمُ بِهِ وَأَمَّا الظَّنُّ الَّذِي لَيْسَ بِإِثْمٍ فَالَّذِي يَظُنُّ وَلاَ يَتَكَلَّمُ بِهِ ‏.‏
Abu Hurairah narrated that the Messenger of Allah said:"Beware of Zann (suspicion), for indeed Zann is the falsest of speech
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 27 · Chapters on Righteousness And Maintaining Good Relations With Relatives

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।