حَدَّثَنَا مَحْمُودُ بْنُ غَيْلاَنَ، حَدَّثَنَا أَبُو دَاوُدَ الْحَفَرِيُّ، عَنْ سُفْيَانَ، عَنْ زِيَادِ بْنِ عِلاَقَةَ، قَالَ سَمِعْتُ الْمُغِيرَةَ بْنَ شُعْبَةَ، يَقُولُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم " لاَ تَسُبُّوا الأَمْوَاتَ فَتُؤْذُوا الأَحْيَاءَ " . قَالَ أَبُو عِيسَى وَقَدِ اخْتَلَفَ أَصْحَابُ سُفْيَانَ فِي هَذَا الْحَدِيثِ فَرَوَى بَعْضُهُمْ مِثْلَ رِوَايَةِ الْحَفَرِيِّ وَرَوَى بَعْضُهُمْ عَنْ سُفْيَانَ عَنْ زِيَادِ بْنِ عِلاَقَةَ قَالَ سَمِعْتُ رَجُلاً يُحَدِّثُ عِنْدَ الْمُغِيرَةِ بْنِ شُعْبَةَ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم نَحْوَهُ .
Al-Mughirah bin Shu'bah narrated that the Messenger of Allah said:"Do not vilify the dead (and) by that harm the living
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAhmad Muhammad Shakir
SahihAl-Albani
HasanZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।