حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ مُوسَى، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، عَنْ مَعْمَرٍ، عَنْ أَيُّوبَ، عَنِ ابْنِ أَبِي مُلَيْكَةَ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ مَا كَانَ خُلُقٌ أَبْغَضَ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم مِنَ الْكَذِبِ وَلَقَدْ كَانَ الرَّجُلُ يُحَدِّثُ عِنْدَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم بِالْكِذْبَةِ فَمَا يَزَالُ فِي نَفْسِهِ حَتَّى يَعْلَمَ أَنَّهُ قَدْ أَحْدَثَ مِنْهَا تَوْبَةً . قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ .
Aishah narrated:"There was no behavior more hated to the Messenger of Allah than lying. A man would lie in narrating something in the presence of the Prophet, and he would not be content until he knew that he had repented
स्रोत में दर्ज दर्जे
DaifZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।