सीधे कंटेंट पर जाएँ
जामे तिर्मिज़ी

नंबर 1955

नंबर 1955किताब 27, नंबर 61
حَدَّثَنَا هَنَّادٌ، حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ، عَنِ ابْنِ أَبِي لَيْلَى، ح وَحَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ وَكِيعٍ، حَدَّثَنَا حُمَيْدُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الرُّؤَاسِيُّ، عَنِ ابْنِ أَبِي لَيْلَى، عَنْ عَطِيَّةَ، عَنْ أَبِي سَعِيدٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَنْ لَمْ يَشْكُرِ النَّاسَ لَمْ يَشْكُرِ اللَّهَ ‏"‏ ‏.‏ وَفِي الْبَابِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ وَالأَشْعَثِ بْنِ قَيْسٍ وَالنُّعْمَانِ بْنِ بَشِيرٍ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏
Abu Sa'eed narrated that the Messenger of Allah said :"Whoever is not grateful to the people, he is not grateful to Allah
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih LighairihiAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 27 · Chapters on Righteousness And Maintaining Good Relations With Relatives

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।