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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 1952

नंबर 1952किताब 27, नंबर 58
حَدَّثَنَا نَصْرُ بْنُ عَلِيٍّ الْجَهْضَمِيُّ، حَدَّثَنَا عَامِرُ بْنُ أَبِي عَامِرٍ الْخَزَّازُ، حَدَّثَنَا أَيُّوبُ بْنُ مُوسَى، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ جَدِّهِ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ مَا نَحَلَ وَالِدٌ وَلَدًا مِنْ نَحْلٍ أَفْضَلَ مِنْ أَدَبٍ حَسَنٍ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ غَرِيبٌ لاَ نَعْرِفُهُ إِلاَّ مِنْ حَدِيثِ عَامِرِ بْنِ أَبِي عَامِرٍ الْخَزَّازِ وَهُوَ عَامِرُ بْنُ صَالِحِ بْنِ رُسْتُمَ الْخَزَّازُ وَأَيُّوبُ بْنُ مُوسَى هُوَ ابْنُ عَمْرِو بْنِ سَعِيدِ بْنِ الْعَاصِي ‏.‏ وَهَذَا عِنْدِي حَدِيثٌ مُرْسَلٌ ‏.‏
Ayyub bin Musa narrated from his father, from his grandfather, that the Messenger of Allah said :"There is no gift that a father gives his son more virtuous than good manners
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAhmad Muhammad Shakir
  • DaifAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 27 · Chapters on Righteousness And Maintaining Good Relations With Relatives

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।