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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 1941

नंबर 1941किताब 27, नंबर 47
حَدَّثَنَا عَبْدُ بْنُ حُمَيْدٍ، حَدَّثَنَا زَيْدُ بْنُ الْحُبَابِ الْعُكْلِيُّ، حَدَّثَنِي أَبُو سَلَمَةَ الْكِنْدِيُّ، حَدَّثَنَا فَرْقَدٌ السَّبَخِيُّ، عَنْ مُرَّةَ بْنِ شَرَاحِيلَ الْهَمْدَانِيِّ، وَهُوَ الطَّيِّبُ - عَنْ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَلْعُونٌ مَنْ ضَارَّ مُؤْمِنًا أَوْ مَكَرَ بِهِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ غَرِيبٌ ‏.‏
Abu Bakr As-Siddiq narrated that the Messenger of Allah said:"Cursed are those who harm a believer, or plot to do so
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAhmad Muhammad Shakir
  • DaifAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 27 · Chapters on Righteousness And Maintaining Good Relations With Relatives

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।