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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 1937

नंबर 1937किताब 27, नंबर 43
حَدَّثَنَا هَنَّادٌ، حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ أَبِي سُفْيَانَ، عَنْ جَابِرٍ، قَالَ قَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ إِنَّ الشَّيْطَانَ قَدْ يَئِسَ أَنْ يَعْبُدَهُ الْمُصَلُّونَ وَلَكِنْ فِي التَّحْرِيشِ بَيْنَهُمْ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ وَفِي الْبَابِ عَنْ أَنَسٍ وَسُلَيْمَانَ بْنِ عَمْرِو بْنِ الأَحْوَصِ عَنْ أَبِيهِ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ ‏.‏ وَأَبُو سُفْيَانَ اسْمُهُ طَلْحَةُ بْنُ نَافِعٍ ‏.‏
Jabir narrated that the Messenger of Allah said:"Indeed Ash-Shaitan has despaired of getting those who perform Salat to worship him.But he is engaged in sowing hatred among them
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 27 · Chapters on Righteousness And Maintaining Good Relations With Relatives

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।