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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 1852

नंबर 1852किताब 25, नंबर 69
حَدَّثَنَا مَحْمُودُ بْنُ غَيْلاَنَ، حَدَّثَنَا أَبُو أَحْمَدَ الزُّبَيْرِيُّ، وَأَبُو نُعَيْمٍ قَالاَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عِيسَى، عَنْ رَجُلٍ، يُقَالُ لَهُ عَطَاءٌ مِنْ أَهْلِ الشَّامِ عَنْ أَبِي أَسِيدٍ قَالَ قَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ كُلُوا الزَّيْتَ وَادَّهِنُوا بِهِ فَإِنَّهُ مِنْ شَجَرَةٍ مُبَارَكَةٍ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ غَرِيبٌ مِنْ هَذَا الْوَجْهِ إِنَّمَا نَعْرِفُهُ مِنْ حَدِيثِ سُفْيَانَ الثَّوْرِيِّ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عِيسَى ‏.‏
Narrated Abu Asid: "The Prophet (ﷺ) said: Eat of its oil and use it (the olives), for indeed it is from a blessed tree." [Abu 'Eisa said:] This Hadith is Gharib from this route. We only know of it from the narration of Sufyan At-Thawri, from 'Abdullah bin 'Eisa
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih LighairihiAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · The Book on Food

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।