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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 1802

नंबर 1802किताब 25, नंबर 16
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ، حَدَّثَنَا ابْنُ لَهِيعَةَ، عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ، عَنْ جَابِرٍ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ إِذَا أَكَلَ أَحَدُكُمْ طَعَامًا فَسَقَطَتْ لُقْمَةٌ فَلْيُمِطْ مَا رَابَهُ مِنْهَا ثُمَّ لْيَطْعَمْهَا وَلاَ يَدَعْهَا لِلشَّيْطَانِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ وَفِي الْبَابِ عَنْ أَنَسٍ ‏.‏
Narrated Jabir: That the Prophet (ﷺ) said: "When one of you eats food, and he drops a pieces of it, then let him remove anything suspicious from it and eat it. Do not leave it for Ash-Shaitan." He said: There is something about this from Anas
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · The Book on Food

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।