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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 1692

नंबर 1692किताब 23, नंबर 23
حَدَّثَنَا أَبُو سَعِيدٍ الأَشَجُّ، حَدَّثَنَا يُونُسُ بْنُ بُكَيْرٍ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ إِسْحَاقَ، عَنْ يَحْيَى بْنِ عَبَّادِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الزُّبَيْرِ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ جَدِّهِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الزُّبَيْرِ، عَنِ الزُّبَيْرِ بْنِ الْعَوَّامِ، قَالَ كَانَ عَلَى النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم دِرْعَانِ يَوْمَ أُحُدٍ فَنَهَضَ إِلَى الصَّخْرَةِ فَلَمْ يَسْتَطِعْ فَأَقْعَدَ طَلْحَةَ تَحْتَهُ فَصَعِدَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم عَلَيْهِ حَتَّى اسْتَوَى عَلَى الصَّخْرَةِ فَقَالَ سَمِعْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ أَوْجَبَ طَلْحَةُ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى وَفِي الْبَابِ عَنْ صَفْوَانَ بْنِ أُمَيَّةَ وَالسَّائِبِ بْنِ يَزِيدَ ‏.‏ وَهَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ لاَ نَعْرِفُهُ إِلاَّ مِنْ حَدِيثِ مُحَمَّدِ بْنِ إِسْحَاقَ ‏.‏
ज़ुबैर बिन अव्वाम -रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि उहुद युद्ध के दिन नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- दो-दो कवच पहने हुए थे। आप एक चट्टान पर चढ़ने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन चढ़ नहीं पा रहे थे। ऐसे में, नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने तलहा (रज़ियल्लाहु अन्हु) को अपने नीचे बिठाया, उनके ऊपर चढ़े और चट्टान पर सीधे खड़े हो गए। वह कहते हैं कि मैंने नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को कहते सुना हैः " तलहा (जन्नत का) हक़दार बन गया।"

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में दर्ज दर्जे
  • HasanAhmad Muhammad Shakir
  • HasanAl-Albani
  • HasanBashar Awad Maarouf
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 23 · The Book on Jihad

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।