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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 1685

नंबर 1685किताब 23, नंबर 16
حَدَّثَنَا مَحْمُودُ بْنُ غَيْلاَنَ، حَدَّثَنَا أَبُو دَاوُدَ الطَّيَالِسِيُّ، قَالَ أَنْبَأَنَا شُعْبَةُ، عَنْ قَتَادَةَ، حَدَّثَنَا أَنَسُ بْنُ مَالِكٍ، قَالَ رَكِبَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم فَرَسًا لأَبِي طَلْحَةَ يُقَالُ لَهُ مَنْدُوبٌ فَقَالَ ‏ "‏ مَا كَانَ مِنْ فَزَعٍ وَإِنْ وَجَدْنَاهُ لَبَحْرًا ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى وَفِي الْبَابِ عَنِ ابْنِ عَمْرِو بْنِ الْعَاصِ ‏.‏ وَهَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏
Narrated Anas bin Malik: "The Prophet (ﷺ) rode a horse belonging to Abu Talhah called Mandub. He said: 'There is nothing to be frightened of, and we found him to be (quick) like the sea.'" [Abu 'Eisa said:] There is something on this topic from Ibn 'Amr Al-'As
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 23 · The Book on Jihad

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।