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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 1635

नंबर 1635किताब 22, नंबर 17
حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ مَنْصُورٍ الْمَرْوَزِيُّ، أَخْبَرَنَا حَيْوَةُ بْنُ شُرَيْحٍ الْحِمْصِيُّ، عَنْ بَقِيَّةَ، عَنْ بَحِيرِ بْنِ سَعْدٍ، عَنْ خَالِدِ بْنِ مَعْدَانَ، عَنْ كَثِيرِ بْنِ مُرَّةَ، عَنْ عَمْرِو بْنِ عَبَسَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ مَنْ شَابَ شَيْبَةً فِي سَبِيلِ اللَّهِ كَانَتْ لَهُ نُورًا يَوْمَ الْقِيَامَةِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ غَرِيبٌ ‏.‏ وَحَيْوَةُ بْنُ شُرَيْحِ ابْنُ يَزِيدَ الْحِمْصِيُّ ‏.‏
Narrated Amr bin 'Abasah: That the Messenger of Allah (ﷺ) said: "Whoever develops some gray hair in the cause of Allah, it shall be a light for him in the Day of Judgement. [Abu 'Eisa said:] This Hadith is Hasan Sahih Gharib. As for Haiwah bin Shuraih, (the remainder of his name is) Ibn Yazid Al-Himsi
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 22 · The Book on Virtues of Jihad

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।