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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 1606

नंबर 1606किताब 21, नंबर 69
حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الْكِنْدِيُّ، حَدَّثَنَا زَيْدُ بْنُ الْحُبَابِ، أَخْبَرَنَا سُفْيَانُ الثَّوْرِيُّ، عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ، عَنْ جَابِرٍ، عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لَئِنْ عِشْتُ إِنْ شَاءَ اللَّهُ لأُخْرِجَنَّ الْيَهُودَ وَالنَّصَارَى مِنْ جَزِيرَةِ الْعَرَبِ ‏"‏ ‏.‏
Narrated 'Umar bin Al-Khattab:That the Messenger of Allah (ﷺ) said: "If I live - if Allah wills - I will expel the Jews and the Christians from the Arabian Peninsula
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 21 · The Book on Military Expeditions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।