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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 1592

नंबर 1592किताब 21, नंबर 54
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ، حَدَّثَنَا حَاتِمُ بْنُ إِسْمَاعِيلَ، عَنْ يَزِيدَ بْنِ أَبِي عُبَيْدٍ، قَالَ قُلْتُ لِسَلَمَةَ بْنِ الأَكْوَعِ عَلَى أَىِّ شَيْءٍ بَايَعْتُمْ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَوْمَ الْحُدَيْبِيَةِ قَالَ عَلَى الْمَوْتِ ‏.‏ هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏
Narrated Yazid bin Abi 'Ubaid: "I said to Salamah bin Al-Akwa': "For what did you pledge to the Messenger of Allah (ﷺ) on the Day of Al-Hudaibiyyah?" He said: "For death." This Hadith is Hasan Sahih
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 21 · The Book on Military Expeditions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।