सीधे कंटेंट पर जाएँ
जामे तिर्मिज़ी

नंबर 430

नंबर 430किताब 2, नंबर 283
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ مُوسَى، وَمَحْمُودُ بْنُ غَيْلاَنَ، وَأَحْمَدُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ الدَّوْرَقِيُّ، وَغَيْرُ، وَاحِدٍ، قَالُوا حَدَّثَنَا أَبُو دَاوُدَ الطَّيَالِسِيُّ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مُسْلِمِ بْنِ مِهْرَانَ، سَمِعَ جَدَّهُ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ رَحِمَ اللَّهُ امْرَأً صَلَّى قَبْلَ الْعَصْرِ أَرْبَعًا ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ غَرِيبٌ حَسَنٌ ‏.‏
Ibn Umar narrated that :The Prophet (S) said: "May Allah have mercy upon a man who prays four before Al-Asr
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • HasanAhmad Muhammad Shakir
  • HasanAl-Albani
  • HasanBashar Awad Maarouf
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · The Book on Salat (Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।