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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 427

नंबर 427किताब 2, नंबर 280
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ، أَخْبَرَنَا يَزِيدُ بْنُ هَارُونَ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ الشُّعَيْثِيِّ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَنْبَسَةَ بْنِ أَبِي سُفْيَانَ، عَنْ أُمِّ حَبِيبَةَ، قَالَتْ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَنْ صَلَّى قَبْلَ الظُّهْرِ أَرْبَعًا وَبَعْدَهَا أَرْبَعًا حَرَّمَهُ اللَّهُ عَلَى النَّارِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ وَقَدْ رُوِيَ مِنْ غَيْرِ هَذَا الْوَجْهِ ‏.‏
Umm Habibah narrated that:Allah's Messenger (S) said: "Whoever prays four before Az-Zuhr and four after, Allah makes him prohibited for the Fire
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · The Book on Salat (Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।