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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 393

नंबर 393किताब 2, नंबर 246
حَدَّثَنَا هَنَّادٌ، وَمَحْمُودُ بْنُ غَيْلاَنَ، قَالاَ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ، عَنْ عَلْقَمَةَ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم سَجَدَ سَجْدَتَىِ السَّهْوِ بَعْدَ الْكَلاَمِ ‏.‏ قَالَ وَفِي الْبَابِ عَنْ مُعَاوِيَةَ وَعَبْدِ اللَّهِ بْنِ جَعْفَرٍ وَأَبِي هُرَيْرَةَ ‏.‏
Abdullah (bin Masud) narrated:"The Prophet (S) performed two prostrations for As-Sahw after talking
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · The Book on Salat (Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।